संदेश

श्रीरामजन्मभूमि मंदिर - संघर्ष और कर्तव्य

चित्र
५०० साल के अविरत संघर्ष का मीठा फल खाने का आज समय है।  पुण्यभूमि अयोध्या के माथे पर लगा आक्रांता का कलंक आज मिट जाएंगा।  आज श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भूमिपूजन के साथ मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो जाएंगा।  लगभग अगले ३ साल में रामजन्मभूमि मंदिर का निर्माण पूरा होगा, लेकिन महत्व का प्रश्न ये है की, क्या इसके साथ हिन्दुओ का संघर्ष खत्म हुवा? आज भी इस देश में ऐसे अतिबौध्दिक महानुभव है, जिन्हे लगता है ९० के दशक में राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ और भाजपने अपनी राजनीती चमकाने के लिए यह रामजन्मभूमि मंदिर संघर्ष का मुद्दा उठाया।  अनेक अतिबौध्दिक महानुभव यह भी कहते है की अगर १९९२ में "विवादित ढांचा" गिराया गया इसीलिए हिन्दु न्यायालय में पर्याप्त सबूत पेश करने में कामयाब हुवे।  तो अनेक अतिबौध्दिक महानुभव इस न्यायालयीन फैसले को बतौर पुख्ता सबूत यह फैसला श्रध्दा के पक्ष में लिया गया फैसला मानते है।  यह अतिबौध्दिक महानुभव इन्ही दलीलों के माध्यम से रामजन्मभूमि मंदिर के लिए चले ५०० साल के संघर्ष को, जिसमे ३०० साल का रक्तरंजित संघर्ष और करीब २०० साल का आधुनिक न्यायालयीन संघर्ष शा...

वह जब याद आये .... बड़े याद आये

चित्र
देश की राजनीती चायनीज कोरोना विषाणु के प्रकोप, राम मंदिर भूमिपूजन, राफेल, लॉकडाउन -अनलॉक के दावे प्रतिदावों में उलझन में फसी है।  इसी राजनीती के बिच भारतीय कांग्रेस पक्षने भी अपनी राजनीती तेलंगना राज्य के जरिये देश भर में चमकाने के लिए डाव खेला। यह डाव था १६ साल बाद कांग्रेस के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री  स्व.पि व्ही नरसिंहरावजी को याद करना, कांग्रेस ने सिर्फ उनकी याद ही नहीं निकली तो उन्होंने देश के आर्थिक विकास में दिए योगदान के लिए तारीफों के पुल भी बांधे। आश्चर्य तब हुवा जब यह तारीफ कांग्रेस की सर्वेसर्वा सोनिया गाँधी की तरफ से की गयी।  पी चितंबरम, कपिल सिब्बल, राहुल गाँधी जैसे कांग्रेस नेताओ ने भी  स्व.पि व्ही नरसिंहरावजी के तारीफों की झडी लगादी।   कभी कोंग्रेसने इसी पूर्व प्रधानमंत्री के शव को ना कांग्रेस के दिल्ली स्थित मुख्यालय में जगह दी थी, ना दिल्ली के राजघाट में अंतिम संस्कार करने की इजाजत, कांग्रेस मुख्यालय के गेट के सामने खड़े रख वही से  स्व.पि व्ही नरसिंहरावजी का शव अंतिम संस्कार के लिए सीधे हैदराबाद के लिए र...

श्रीमती इंदिरा गाँधी के हत्या का सच !

चित्र
कांग्रेस के राजकुमार राहुल गाँधी हमेशा अपने दादी का देश के लिए दिए बलिदान को याद करते है | यह सच है की स्व. इंदिरा गाँधीजी की हत्या हुवी | यह भी सच है की पंजाब में पनपे देश विरोधी ताकद को परास्त करने के लिए सिख समुदाय के श्रद्धास्थान सुवर्ण मंदिर में किये गए फौजी करवाई के विरोध में, एवम तथाकथित सिख संत भिंडरावाले के मृत्यु का बदला लेने के लिए श्रीमती इंदिरा गाँधी को मारा गया | पर यह सरासर "अर्धसत्य" है ! सच तो यह है की पंजाब में अपनी राजनीती चमकाने, अपनी राजकीय महत्वाक्षां के चलते स्व श्रीमती इंदिरा गाँधी एवम उनके सुपुत्र स्व संजय गाँधी ने भिंडरावाले का भुत पंजाब में खड़ा किया जिसका खामियाजा न की सिर्फ पंजाब को अपितु सारे देश को भुगतना पड़ा |    १९७७ के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार हुवी, अकाली दल पंजाब में सक्षम राजनैतिक पक्ष में उभरा, प्रकाशसिंह बादल बतौर पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में विराजमान हुवे | इतना ही नहीं तो इस के बाद पंजाब में संपन्न हुवे हर चुनाव में अकाली दल ने कांग्रेस को हार का चेहरा बारबार दिखाया | अकाली दल के इस विजयी अश्व को लगाम लगाने हेतु कांग्र...